श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.21.32

नवम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

यवीनरो बृहदिषुः काम्पिल्यः संजयः सुताः।

भर्म्याश्‍वः प्राह पुत्रा मे पंचानां रक्षणाय हि॥ ३२

yavīnaro bṛhadiṣuḥ kāmpilyaḥ saṃjayaḥ sutāḥ|

bharmyāśvaḥ prāha putrā me paṃcānāṃ rakṣaṇāya hi|| 32

अर्थ

रिपुंजयका पुत्र था बहुरथ। द्विमीढके भाई पुरुमीढको कोई सन्तान न हुई। अजमीढकी दूसरी पत्‍नीका नाम था नलिनी। उसके गर्भसे नीलका जन्म हुआ। नीलका शान्ति, शान्तिका सुशान्ति, सुशान्तिका पुरुज, पुरुजका अर्क और अर्कका पुत्र हुआ भर्म्याश्‍व। भर्म्याश्‍वके पाँच पुत्र थे—मुद्गल, यवीनर, बृहदिषु, काम्पिल्य और संजय। भर्म्याश्‍वने कहा—‘ये मेरे पुत्र पाँच देशोंका शासन करनेमें समर्थ (पंच अलम्) हैं।’ इसलिये ये ‘पंचाल’ नामसे प्रसिद्ध हुए। इनमें मुद्गलसे ‘मौद्गल्य’ नामक ब्राह्मणगोत्रकी प्रवृत्ति हुई॥ ३०—३३॥

यह अर्थ श्लोक 30–33 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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