श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.21.8

नवम स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

याते शूद्रे तमन्योऽगादतिथिः श्‍वभिरावृतः।

राजन् मे दीयतामन्‍नं सगणाय बुभुक्षते॥ ८

yāte śūdre tamanyo'gādatithiḥ śvabhirāvṛtaḥ|

rājan me dīyatāmannaṃ sagaṇāya bubhukṣate|| 8

अर्थ

जब शूद्र खा-पीकर चला गया, तब कुत्तोंको लिये हुए एक और अतिथि आया। उसने कहा—‘राजन्! मैं और मेरे ये कुत्ते बहुत भूखे हैं। हमें कुछ खानेको दीजिये’॥ ८॥✎ 881

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #881 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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