श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.22.27

नवम स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

शापान्मैथुनरुद्धस्य पाण्डोः कुन्त्यां महारथाः।

जाता धर्मानिलेन्द्रेभ्यो युधिष्ठिरमुखास्त्रयः॥ २७

śāpānmaithunaruddhasya pāṇḍoḥ kuntyāṃ mahārathāḥ|

jātā dharmānilendrebhyo yudhiṣṭhiramukhāstrayaḥ|| 27

अर्थ

पाण्डुकी पत्‍नी थी कुन्ती। शापवश पाण्डु स्त्री-सहवास नहीं कर सकते थे। इसलिये उनकी पत्‍नी कुन्तीके गर्भसे धर्म, वायु और इन्द्रके द्वारा क्रमशः युधिष्ठिर, भीमसेन और अर्जुन नामके तीन पुत्र उत्पन्‍न हुए। ये तीनों-के-तीनों महारथी थे॥ २७॥

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