॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.23.2
जनमेजयस्तस्य पुत्रो महाशीलो महामनाः।
उशीनरस्तितिक्षुश्च महामनस आत्मजौ॥ २
janamejayastasya putro mahāśīlo mahāmanāḥ|
uśīnarastitikṣuśca mahāmanasa ātmajau|| 2
अर्थ
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! ययातिनन्दन अनुके तीन पुत्र हुए—सभानर, चक्षु और परोक्ष। सभानरका कालनर, कालनरका सृंजय, सृंजयका जनमेजय, जनमेजयका महाशील, महाशीलका पुत्र हुआ महामना। महामनाके दो पुत्र हुए—उशीनर एवं तितिक्षु॥ १-२॥✎ 1649