श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.23.2

नवम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

जनमेजयस्तस्य पुत्रो महाशीलो महामनाः।

उशीनरस्तितिक्षुश्‍च महामनस आत्मजौ॥ २

janamejayastasya putro mahāśīlo mahāmanāḥ|

uśīnarastitikṣuśca mahāmanasa ātmajau|| 2

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! ययातिनन्दन अनुके तीन पुत्र हुए—सभानर, चक्षु और परोक्ष। सभानरका कालनर, कालनरका सृंजय, सृंजयका जनमेजय, जनमेजयका महाशील, महाशीलका पुत्र हुआ महामना। महामनाके दो पुत्र हुए—उशीनर एवं तितिक्षु॥ १-२॥✎ 1649

यह अर्थ श्लोक 1–2 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1649 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: ययाति-नन्दन → ययातिनन्दन

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