‘मैं तो जन्मसे ही बाँझ हूँ और मेरी कोई सौत भी नहीं है। फिर यह मेरी पुत्रवधू कैसे हो सकती है?’ ज्यामघने कहा—‘रानी! तुमको जो पुत्र होगा, उसकी यह पत्नी बनेगी’॥ ३८॥
अहं वन्ध्यासपत्नी च स्नुषा मे युज्यते कथम्।
जनयिष्यसि यं राज्ञि तस्येयमुपयुज्यते॥ ३८
‘मैं तो जन्मसे ही बाँझ हूँ और मेरी कोई सौत भी नहीं है। फिर यह मेरी पुत्रवधू कैसे हो सकती है?’ ज्यामघने कहा—‘रानी! तुमको जो पुत्र होगा, उसकी यह पत्नी बनेगी’॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.23.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 112) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/23/38/