श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.22

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

देववानुपदेवश्‍च सुदेवो देववर्धनः।

तेषां स्वसारः सप्तासन् धृतदेवादयो नृप॥ २२

devavānupadevaśca sudevo devavardhanaḥ|

teṣāṃ svasāraḥ saptāsan dhṛtadevādayo nṛpa|| 22

अर्थ

देववान्, उपदेव, सुदेव और देववर्धन। इनकी सात बहिनें भी थीं—धृत, देवा, शान्तिदेवा, उपदेवा, श्रीदेवा, देवरक्षिता, सहदेवा और देवकी। वसुदेवजीने इन सबके साथ विवाह किया था॥ २२-२३॥

यह अर्थ श्लोक 22–23 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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