श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.26

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

शूरो विदूरथादासीद् भजमानः सुतस्ततः।

शिनिस्तस्मात् स्वयम्भोजो हृदीकस्तत्सुतो मतः॥ २६

śūro vidūrathādāsīd bhajamānaḥ sutastataḥ|

śinistasmāt svayambhojo hṛdīkastatsuto mataḥ|| 26

अर्थ

चित्ररथके पुत्र विदूरथसे शूर, शूरसे भजमान, भजमानसे शिनि, शिनिसे स्वयम्भोज और स्वयम्भोजसे हृदीक हुए॥ २६॥

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