श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.33

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

तदैवोपागतं देवं वीक्ष्य विस्मितमानसा।

प्रत्ययार्थं प्रयुक्ता मे याहि देव क्षमस्व मे॥ ३३

tadaivopāgataṃ devaṃ vīkṣya vismitamānasā|

pratyayārthaṃ prayuktā me yāhi deva kṣamasva me|| 33

अर्थ

उसी समय भगवान् सूर्य वहाँ आ पहुँचे। उन्हें देखकर कुन्तीका हृदय विस्मयसे भर गया। उसने कहा—‘भगवन्! मुझे क्षमा कीजिये। मैंने तो परीक्षा करनेके लिये ही इस विद्याका प्रयोग किया था। अब आप पधार सकते हैं’॥ ३३॥

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