यह कहकर भगवान् सूर्यने गर्भ स्थापित कर दिया और इसके बाद वे स्वर्ग चले गये। उसी समय उससे एक बड़ा सुन्दर एवं तेजस्वी शिशु उत्पन्न हुआ। वह देखनेमें दूसरे सूर्यके समान जान पड़ता था॥ ३५॥
इति तस्यां स आधाय गर्भं सूर्यो दिवं गतः।
सद्यः कुमारः संजज्ञे द्वितीय इव भास्करः॥ ३५
यह कहकर भगवान् सूर्यने गर्भ स्थापित कर दिया और इसके बाद वे स्वर्ग चले गये। उसी समय उससे एक बड़ा सुन्दर एवं तेजस्वी शिशु उत्पन्न हुआ। वह देखनेमें दूसरे सूर्यके समान जान पड़ता था॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.24.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 115) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/24/35/