श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.37

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

श्रुतदेवां तु कारूषो वृद्धशर्मा समग्रहीत्।

यस्यामभूद् दन्तवक्त्र ऋषिशप्तो दितेः सुतः॥ ३७

śrutadevāṃ tu kārūṣo vṛddhaśarmā samagrahīt|

yasyāmabhūd dantavaktra ṛṣiśapto diteḥ sutaḥ|| 37

अर्थ

परीक्षित्! पृथाकी छोटी बहिन श्रुतदेवाका विवाह करूष देशके अधिपति वृद्धशर्मासे हुआ था। उसके गर्भसे दन्तवक्त्रका जन्म हुआ। यह वही दन्तवक्त्र है, जो पूर्वजन्ममें सनकादि ऋषियोंके शापसे हिरण्याक्ष हुआ था॥ ३७॥

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