श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.24.53

नवम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

पुरुविश्रुतमुख्यांस्तु साक्षाद् धर्मो वसूनिव।

वसुदेवस्तु देवक्यामष्ट पुत्रानजीजनत्॥ ५३

puruviśrutamukhyāṃstu sākṣād dharmo vasūniva|

vasudevastu devakyāmaṣṭa putrānajījanat|| 53

अर्थ

देवरक्षिताके गर्भसे गद आदि नौ पुत्र हुए तथा जैसे स्वयं धर्मने आठ वसुओंको उत्पन्‍न किया था, वैसे ही वसुदेवजीने सहदेवाके गर्भसे पुरुविश्रुत आदि आठ पुत्र उत्पन्‍न किये। परम उदार वसुदेवजीने देवकीके गर्भसे भी आठ पुत्र उत्पन्‍न किये, जिनमें सातके नाम हैं—कीर्तिमान्, सुषेण, भद्रसेन, ऋजु, संमर्दन, भद्र और शेषावतार श्रीबलरामजी॥ ५२—५४॥

यह अर्थ श्लोक 52–54 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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