उत्सवके अन्तमें ब्रह्माजीको नमस्कार करके उन्होंने अपना अभिप्राय निवेदन किया। उनकी बात सुनकर भगवान् ब्रह्माजीने हँसकर उनसे कहा—॥ ३१॥
तदन्त आद्यमानम्य स्वाभिप्रायं न्यवेदयत्।
तच्छ्रुत्वा भगवान् ब्रह्मा प्रहस्य तमुवाच ह॥ ३१
उत्सवके अन्तमें ब्रह्माजीको नमस्कार करके उन्होंने अपना अभिप्राय निवेदन किया। उनकी बात सुनकर भगवान् ब्रह्माजीने हँसकर उनसे कहा—॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.3.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 17) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/3/31/