श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.49

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तदभिद्रवदुद्वीक्ष्य५ स्वप्रयासं च निष्फलम्।

दुर्वासा दुद्रुवे भीतो दिक्षु प्राणपरीप्सया॥ ४९

tadabhidravadudvīkṣya svaprayāsaṃ ca niṣphalam|

durvāsā dudruve bhīto dikṣu prāṇaparīpsayā|| 49

अर्थ

जब दुर्वासाजीने देखा कि मेरी बनायी हुई कृत्या तो जल रही है और चक्र मेरी ओर आ रहा है, तब वे भयभीत हो अपने प्राण बचानेके लिये जी छोड़कर एकाएक भाग निकले॥ ४९॥

टिप्पणियाँ

  1. ५

    द्रवमुद्वी०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 24)

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