श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.4.5

नवम स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

दास्यन्ति तेऽथ तान् गच्छ तथा स कृतवान् यथा।

तस्मै दत्त्वा ययुः स्वर्गं ते सत्रपरिशेषितम्१॥ ५

dāsyanti te'tha tān gaccha tathā sa kṛtavān yathā|

tasmai dattvā yayuḥ svargaṃ te satrapariśeṣitam|| 5

अर्थ

तुम उन महात्माओंके पास जाकर उन्हें वैश्‍व-देवसम्बन्धी दो सूक्त बतला दो; जब वे स्वर्ग जाने लगेंगे, तब यज्ञसे बचा हुआ अपना सारा धन तुम्हें दे देंगे। इसलिये अब तुम उन्हींके पास चले जाओ।’ उसने अपने पिताके आज्ञानुसार वैसा ही किया। उन आंगिरसगोत्री ब्राह्मणोंने भी यज्ञका बचा हुआ धन उसे दे दिया और वे स्वर्गमें चले गये॥ ४-५॥

यह अर्थ श्लोक 4–5 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

टिप्पणियाँ

  1. १

    शेषणम्।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 19)

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