श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.5.11

नवम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

यदि नो भगवान् प्रीत एकः सर्वगुणाश्रयः।

सर्वभूतात्मभावेन द्विजो भवतु विज्वरः॥ ११

yadi no bhagavān prīta ekaḥ sarvaguṇāśrayaḥ|

sarvabhūtātmabhāvena dvijo bhavatu vijvaraḥ|| 11

अर्थ

भगवान् समस्त गुणोंके एक-मात्र आश्रय हैं। यदि मैंने समस्त प्राणियोंके आत्माके रूपमें उन्हें देखा हो और वे मुझपर प्रसन्‍न हों तो दुर्वासाजीके हृदयकी सारी जलन मिट जाय॥ ११॥

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