श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.10

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

स तु विप्रेण संवादं जापकेन समाचरन्।

त्यक्त्वा कलेवरं योगी स तेनावाप यत् परम्॥ १०

sa tu vipreṇa saṃvādaṃ jāpakena samācaran|

tyaktvā kalevaraṃ yogī sa tenāvāpa yat param|| 10

अर्थ

तदनन्तर राजा इक्ष्वाकुने अपने गुरुदेव वसिष्ठसे ज्ञानविषयक चर्चा की। फिर योगके द्वारा शरीरका परित्याग करके उन्होंने परमपद प्राप्त किया॥ १०॥

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