श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.15

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

स संनद्धो धनुर्दिव्यमादाय विशिखाञ्छितान्।

स्तूयमानः स२मारुह्य युयुत्सुः ककुदि स्थितः॥ १५

sa saṃnaddho dhanurdivyamādāya viśikhāñchitān|

stūyamānaḥ samāruhya yuyutsuḥ kakudi sthitaḥ|| 15

अर्थ

सर्वान्तर्यामी भगवान् विष्णुने अपनी शक्तिसे पुरंजयको भर दिया। उन्होंने कवच पहनकर दिव्य धनुष और तीखे बाण ग्रहण किये। इसके बाद बैलपर चढ़कर वे उसके ककुद् (डील)-के पास बैठ गये। जब इस प्रकार वे युद्धके लिये तत्पर हुए तब देवता उनकी स्तुति करने लगे। देवताओंको साथ लेकर उन्होंने पश्‍चिमकी ओरसे दैत्योंका नगर घेर लिया॥ १५-१६॥

यह अर्थ श्लोक 15–16 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

टिप्पणियाँ

  1. २

    स गन्धर्वैः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 33)

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