॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 9.6.21
शाबस्तस्तत्सुतो येन शाबस्ती निर्ममे पुरी।
बृहदश्वस्तु शाबस्तिस्ततः कुवलयाश्वकः॥ २१
śābastastatsuto yena śābastī nirmame purī|
bṛhadaśvastu śābastistataḥ kuvalayāśvakaḥ|| 21
अर्थ
पुरंजयका पुत्र था अनेना। उसका पुत्र पृथु हुआ। पृथुके विश्वरन्धि, उसके चन्द्र और चन्द्रके युवनाश्व॥ २०॥ युवनाश्वके पुत्र हुए शाबस्त, जिन्होंने शाबस्तीपुरी बसायी। शाबस्तके बृहदश्व और उसके कुवलयाश्व हुए॥ २१॥ ये बड़े बली थे। इन्होंने उतंक ऋषिको प्रसन्न करनेके लिये अपने इक्कीस हजार पुत्रोंको साथ लेकर धुन्धु नामक दैत्यका वध किया॥ २२॥ इसीसे उनका नाम हुआ ‘धुन्धुमार’। धुन्धु दैत्यके मुखकी आगसे उनके सब पुत्र जल गये। केवल तीन ही बच रहे थे॥ २३॥ परीक्षित्! बचे हुए पुत्रोंके नाम थे—दृढाश्व, कपिलाश्व और भद्राश्व। दृढाश्वसे हर्यश्व और उससे निकुम्भका जन्म हुआ॥ २४॥