श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.23

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

धुन्धुमार इति ख्यातस्तत्सुतास्ते च जज्वलुः।

धुन्धोर्मुखाग्‍निना सर्वे त्रय एवावशेषिताः॥ २३

dhundhumāra iti khyātastatsutāste ca jajvaluḥ|

dhundhormukhāgninā sarve traya evāvaśeṣitāḥ|| 23

अर्थ

इसीसे उनका नाम हुआ ‘धुन्धुमार’। धुन्धु दैत्यके मुखकी आगसे उनके सब पुत्र जल गये। केवल तीन ही बच रहे थे॥ २३॥

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