इसीसे उनका नाम हुआ ‘धुन्धुमार’। धुन्धु दैत्यके मुखकी आगसे उनके सब पुत्र जल गये। केवल तीन ही बच रहे थे॥ २३॥
धुन्धुमार इति ख्यातस्तत्सुतास्ते च जज्वलुः।
धुन्धोर्मुखाग्निना सर्वे त्रय एवावशेषिताः॥ २३
इसीसे उनका नाम हुआ ‘धुन्धुमार’। धुन्धु दैत्यके मुखकी आगसे उनके सब पुत्र जल गये। केवल तीन ही बच रहे थे॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.6.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 34) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/6/23/