श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.25

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

बर्हणाश्‍वो१ निकुम्भस्य कृशाश्‍वोऽथास्य २ सेनजित्।

युवनाश्‍वोऽभवत् तस्य सोऽनपत्यो वनं गतः॥ २५

barhaṇāśvo nikumbhasya kṛśāśvo'thāsya senajit|

yuvanāśvo'bhavat tasya so'napatyo vanaṃ gataḥ|| 25

अर्थ

निकुम्भके बर्हणाश्‍व, उसके कृशाश्‍व, कृशाश्‍वके सेनजित् और सेनजित्के युवनाश्‍व नामक पुत्र हुआ। युवनाश्‍व सन्तानहीन था, इसलिये वह बहुत दुःखी होकर अपनी सौ स्त्रियोंके साथ वनमें चला गया। वहाँ ऋषियोंने बड़ी कृपा करके युवनाश्‍वसे पुत्रप्राप्तिके लिये बड़ी एकाग्रताके साथ इन्द्रदेवताका यज्ञ कराया॥ २५-२६॥✎ 1636

यह अर्थ श्लोक 25–26 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

टिप्पणियाँ

  1. १

    बार्हश्‍वासो।

    (मुद्रित पृष्ठ 34)
  2. २

    शाश्‍वश्‍चास्य।

    (मुद्रित पृष्ठ 34)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1636 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पुत्र-प्राप्तिके → पुत्रप्राप्तिके

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें