ब्राह्मण और देवताओंके प्रसादसे उस बालकके पिता युवनाश्वकी भी मृत्यु नहीं हुई। वह वहीं तपस्या करके मुक्त हो गया॥ ३२॥✎ 1636
न ममार पिता तस्य विप्रदेवप्रसादतः।
युवनाश्वोऽथ तत्रैव तपसा सिद्धिमन्वगात्॥ ३२
ब्राह्मण और देवताओंके प्रसादसे उस बालकके पिता युवनाश्वकी भी मृत्यु नहीं हुई। वह वहीं तपस्या करके मुक्त हो गया॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.6.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 35) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/6/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)