श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.37

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

यावत् सूर्य उदेति स्म यावच्च प्रतितिष्ठति।

सर्वं तद् यौवनाश्‍वस्य मान्धातुः क्षेत्रमुच्यते॥ ३७

yāvat sūrya udeti sma yāvacca pratitiṣṭhati|

sarvaṃ tad yauvanāśvasya māndhātuḥ kṣetramucyate|| 37

अर्थ

परीक्षित्! जहाँसे सूर्यका उदय होता है और जहाँ वे अस्त होते हैं, वह सारा-का-सारा भूभाग युवनाश्‍वके पुत्र मान्धाताके ही अधिकारमें था॥ ३७॥✎ 1636

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1636 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: पुत्र-प्राप्तिके → पुत्रप्राप्तिके

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