उन कन्याओंका मन सौभरिजीमें इस प्रकार आसक्त हो गया कि वे उनके लिये आपसके प्रेमभावको तिलांजलि देकर परस्पर कलह करने लगीं और एक-दूसरीसे कहने लगी कि ‘ये तुम्हारे योग्य नहीं, मेरे योग्य हैं॥ ४४॥
तासां कलिरभूद् भूयांस्तदर्थेऽपोह्य सौहृदम्।
ममानुरूपो नायं व इति तद्गतचेतसाम्॥ ४४
उन कन्याओंका मन सौभरिजीमें इस प्रकार आसक्त हो गया कि वे उनके लिये आपसके प्रेमभावको तिलांजलि देकर परस्पर कलह करने लगीं और एक-दूसरीसे कहने लगी कि ‘ये तुम्हारे योग्य नहीं, मेरे योग्य हैं॥ ४४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.6.44 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 36) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/6/44/