श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.44

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तासां कलिरभूद् भूयांस्तदर्थेऽपोह्य सौहृदम्।

ममानुरूपो नायं व इति तद्गतचेतसाम्॥ ४४

tāsāṃ kalirabhūd bhūyāṃstadarthe'pohya sauhṛdam|

mamānurūpo nāyaṃ va iti tadgatacetasām|| 44

अर्थ

उन कन्याओंका मन सौभरिजीमें इस प्रकार आसक्त हो गया कि वे उनके लिये आपसके प्रेमभावको तिलांजलि देकर परस्पर कलह करने लगीं और एक-दूसरीसे कहने लगी कि ‘ये तुम्हारे योग्य नहीं, मेरे योग्य हैं॥ ४४॥

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