सप्तद्वीपवती पृथ्वीके स्वामी मान्धाता सौभरिजीकी इस गृहस्थीका सुख देखकर आश्चर्यचकित हो गये। उनका यह गर्व कि मैं सार्वभौम सम्पत्तिका स्वामी हूँ, जाता रहा॥ ४७॥
यद्गार्हस्थ्यं तु संवीक्ष्य सप्तद्वीपवतीपतिः।
विस्मितः स्तम्भमजहात् सार्वभौमश्रियान्वितम्॥ ४७
सप्तद्वीपवती पृथ्वीके स्वामी मान्धाता सौभरिजीकी इस गृहस्थीका सुख देखकर आश्चर्यचकित हो गये। उनका यह गर्व कि मैं सार्वभौम सम्पत्तिका स्वामी हूँ, जाता रहा॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.6.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 36) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/6/47/