श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.6.54

नवम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

तत्र तप्त्वा तपस्ती३क्ष्णमात्मकर्शनमात्मवान्४।

सहैवाग्‍निभिरात्मानं युयोज परमात्मनि॥ ५४

tatra taptvā tapastīkṣṇamātmakarśanamātmavān|

sahaivāgnibhirātmānaṃ yuyoja paramātmani|| 54

अर्थ

वहाँ जाकर परम संयमी सौभरिजीने बड़ी घोर तपस्या की, शरीरको सुखा दिया तथा आहवनीय आदि अग्‍नियोंके साथ ही अपने-आपको परमात्मामें लीन कर दिया॥ ५४॥

टिप्पणियाँ

  1. ३

    तीव्र०।

    (मुद्रित पृष्ठ 37)
  2. ४

    वित्।

    (मुद्रित पृष्ठ 37)

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