श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.9.21

नवम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

स चिन्तयन्‍नघं राज्ञः सूदरूपधरो गृहे।

गुरवे भोक्तुकामाय पक्त्वा निन्ये नरामिषम्॥ २१

sa cintayannaghaṃ rājñaḥ sūdarūpadharo gṛhe|

gurave bhoktukāmāya paktvā ninye narāmiṣam|| 21

अर्थ

श्रीशुकदेवजीने कहा—परीक्षित्! एक बार राजा सौदास शिकार खेलने गये हुए थे। वहाँ उन्होंने किसी राक्षसको मार डाला और उसके भाईको छोड़ दिया। उसने राजाके इस कामको अन्याय समझा और उनसे भाईकी मृत्युका बदला लेनेके लिये वह रसोइयेका रूप धारण करके उनके घर गया। जब एक दिन भोजन करनेके लिये गुरु वसिष्ठजी राजाके यहाँ आये, तब उसने मनुष्यका मांस राँधकर उन्हें परस दिया॥ २०-२१॥

यह अर्थ श्लोक 20–21 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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