॥ श्रीहरिः ॥
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (पद्मपुराण)
॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम्
कृष्णं नारायणं वन्दे कृष्णं वन्दे व्रजप्रियम्।
कृष्णं द्वैपायनं वन्दे कृष्णं वन्दे पृथासुतम्॥
- 1अथ प्रथमोऽध्यायःदेवर्षि नारदकी भक्तिसे भेंट80 श्लोक
पृष्ठ 33 - 2अथ द्वितीयोऽध्यायःभक्तिका दुःख दूर करनेके लिये नारदजीका उद्योग76 श्लोक
पृष्ठ 40 - 3अथ तृतीयोऽध्यायःभक्तिके कष्टकी निवृत्ति74 श्लोक
पृष्ठ 46 - 4अथ चतुर्थोऽध्यायःगोकर्णोपाख्यान प्रारम्भ81 श्लोक
पृष्ठ 54 - 5अथ पञ्चमोऽध्यायःधुन्धुकारीको प्रेतयोनिकी प्राप्ति और उससे उद्धार90 श्लोक
पृष्ठ 62 - 6अथ षष्ठोऽध्यायःसप्ताहयज्ञकी विधि103 श्लोक
पृष्ठ 70