वज्रनाभने कहा—‘महाराज! आप मुझसे जो कुछ कह रहे हैं, वह सर्वथा आपके अनुरूप है। आपके पिताने भी मुझे धनुर्वेदकी शिक्षा देकर मेरा महान् उपकार किया है॥ १३॥
राजन्नुचितमेतत्ते यदस्मासु प्रभाषसे।
त्वत्पित्रोपकृतश्चाहं धनुर्विद्याप्रदानतः॥ १३
वज्रनाभने कहा—‘महाराज! आप मुझसे जो कुछ कह रहे हैं, वह सर्वथा आपके अनुरूप है। आपके पिताने भी मुझे धनुर्वेदकी शिक्षा देकर मेरा महान् उपकार किया है॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 984) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/1/13/