श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.2

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

नैमिषे सूतमासीनमभिवाद्य महामतिम्।

कथामृतरसास्वादकुशला ऋषयोऽब्रुवन्॥ २

naimiṣe sūtamāsīnamabhivādya mahāmatim|

kathāmṛtarasāsvādakuśalā ṛṣayo'bruvan|| 2

अर्थ

नैमिषारण्यक्षेत्रमें श्रीसूतजी स्वस्थ चित्तसे अपने आसनपर बैठे हुए थे। उस समय भगवान्‌की अमृतमयी लीलाकथाके रसिक, उसके रसास्वादनमें अत्यन्त कुशल शौनकादि ऋषियोंने सूतजीको प्रणाम करके उनसे यह प्रश्‍न किया॥ २॥

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