tenātra trividhā lokāḥ sthitāḥ pūrvaṃ na saṃśayaḥ|| 31
अर्थ
अभी-अभी जो अवतार हुआ था, उसमें भगवान् अपने सभी प्रेमियोंकी अभिलाषाएँ पूर्ण करके अब अन्तर्धान हो चुके हैं। इससे यह निश्चय हुआ कि यहाँ पहले तीन प्रकारके भक्तजन उपस्थित थे; इसमें सन्देह नहीं है॥ ३१॥✎ 908
सर्वेषां वांछितं कृत्वा हरिरन्तर्हितोऽभवत्।
तेनात्र त्रिविधा लोकाः स्थिताः पूर्वं न संशयः॥ ३१
अभी-अभी जो अवतार हुआ था, उसमें भगवान् अपने सभी प्रेमियोंकी अभिलाषाएँ पूर्ण करके अब अन्तर्धान हो चुके हैं। इससे यह निश्चय हुआ कि यहाँ पहले तीन प्रकारके भक्तजन उपस्थित थे; इसमें सन्देह नहीं है॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.1.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 987) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/1/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)