श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.1.42

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

एवमुक्त्वा तु शाण्डिल्यो गतः कृष्णमनुस्मरन्।

विष्णुरातोऽथ वज्रश्‍च परां प्रीतिमवापतुः॥ ४२

evamuktvā tu śāṇḍilyo gataḥ kṛṣṇamanusmaran|

viṣṇurāto'tha vajraśca parāṃ prītimavāpatuḥ|| 42

अर्थ

मुनिवर शाण्डिल्यजी उन दोनोंको इस प्रकार समझा-बुझाकर भगवान् श्रीकृष्णका स्मरण करते हुए अपने आश्रमपर चले गये। उनकी बातें सुनकर राजा परीक्षित् और वज्रनाभ दोनों ही बहुत प्रसन्‍न हुए॥ ४२॥

इति श्रीस्कान्दे महापुराण एकाशीतिसाहस्र्यां संहितायां द्वितीये वैष्णवखण्डे
श्रीमद्भागवतमाहात्म्ये शाण्डिल्योपदिष्टव्रजभूमिमाहात्म्यवर्णनं
नाम प्रथमोऽध्यायः॥ १॥

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