यदि तुम्हें भी उद्धवजीका सत्संग प्राप्त हो जाय, तो तुम सब भी अपने प्रियतम श्रीकृष्णके साथ नित्यविहारका सुख प्राप्त कर लोगी॥ १७॥
तेनैव भवतीनां चेद् भवेदत्र समागमः।
तर्हि नित्यं स्वकान्तेन विहारमपि लप्स्यथ॥ १७
यदि तुम्हें भी उद्धवजीका सत्संग प्राप्त हो जाय, तो तुम सब भी अपने प्रियतम श्रीकृष्णके साथ नित्यविहारका सुख प्राप्त कर लोगी॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.2.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 991) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/2/17/