श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.2

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

उद्धव उवाच

धन्योऽसि राजन् कृष्णैकभक्त्या पूर्णोऽसि नित्यदा।

यस्त्वं निम‌ग्‍नचित्तोऽसि कृष्णसंकीर्तनोत्सवे॥ २

dhanyo'si rājan kṛṣṇaikabhaktyā pūrṇo'si nityadā|

yastvaṃ nimagnacitto'si kṛṣṇasaṃkīrtanotsave|| 2

अर्थ

उद्धवजीने कहा—राजन्! तुम धन्य हो, एकमात्र श्रीकृष्णकी भक्तिसे ही पूर्ण हो! क्योंकि श्रीकृष्ण-संकीर्तनके महोत्सवमें तुम्हारा हृदय इस प्रकार निम‌ग्‍न हो रहा है॥ २॥✎ 1792

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1792 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: एक-मात्र → एकमात्र

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