श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.43

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

उद्धव उवाच

श्रीभागवतमाहात्म्य इमामाख्यायिकां गुरोः।

श्रुत्वा भागवतं लब्ध्वा मुमुदेऽहं प्रणम्य तम्॥ ४३

śrībhāgavatamāhātmya imāmākhyāyikāṃ guroḥ|

śrutvā bhāgavataṃ labdhvā mumude'haṃ praṇamya tam|| 43

अर्थ

उद्धवजी कहते हैं—श्रीमद्भागवतके माहात्म्यके सम्बन्धमें यह आख्यायिका मैंने अपने गुरु श्रीबृहस्पतिजीसे सुनी और उनसे भागवतका उपदेश प्राप्त कर उनके चरणोंमें प्रणाम करके मैं बहुत ही आनन्दित हुआ॥ ४३॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें