इस कारण यहाँ उपस्थित हुए इन सभी भक्तजनोंके कार्यकी सिद्धिके लिये मैं श्रीमद्भागवतका पाठ करूँगा; किन्तु इस कार्यमें तुम्हें ही सहायता करनी पड़ेगी॥ ५१॥
तदेषामपि कार्यार्थं श्रीमद्भागवतं त्वहम्।
प्रवक्ष्यामि सहायोऽत्र त्वयैवानुष्ठितो भवेत्॥ ५१
इस कारण यहाँ उपस्थित हुए इन सभी भक्तजनोंके कार्यकी सिद्धिके लिये मैं श्रीमद्भागवतका पाठ करूँगा; किन्तु इस कार्यमें तुम्हें ही सहायता करनी पड़ेगी॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.3.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 999) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/3/51/