श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.3.55

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

तस्माद् दिग्विजयं याहि कलिनिग्रहमाचर।

अहं तु मासमात्रेण वैष्णवीं रीतिमास्थितः॥ ५५

tasmād digvijayaṃ yāhi kalinigrahamācara|

ahaṃ tu māsamātreṇa vaiṣṇavīṃ rītimāsthitaḥ|| 55

अर्थ

इसलिये तुम दिग्विजयके लिये जाओ और कलियुगको जीतकर अपने वशमें करो। इधर मैं तुम्हारी सहायतासे वैष्णवी रीतिका सहारा लेकर एक महीनेतक यहाँ श्रीमद्भागवतकथाका रसास्वादन कराऊँगा और इस प्रकार भागवतकथाके रसका प्रसार करके इन सभी श्रोताओंको भगवान् मधुसूदनके नित्य गोलोकधाममें पहुँचाऊँगा॥ ५५-५६॥

यह अर्थ श्लोक 55–56 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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