श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.2

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तत्स्वरूपं प्रमाणं च विधिं च श्रवणे वद।

तद्वक्तुर्लक्षणं सूत श्रोतुश्‍चापि वदाधुना॥ २

tatsvarūpaṃ pramāṇaṃ ca vidhiṃ ca śravaṇe vada|

tadvakturlakṣaṇaṃ sūta śrotuścāpi vadādhunā|| 2

अर्थ

सूतजी! अब इस समय आप हमें यह बताइये कि श्रीमद्भागवतका स्वरूप क्या है? उसका प्रमाण—उसकी श्‍लोकसंख्या कितनी है? किस विधिसे उसका श्रवण करना चाहिये? तथा श्रीमद्भागवतके वक्ता और श्रोताके क्या लक्षण हैं? अभिप्राय यह कि उसके वक्ता और श्रोता कैसे होने चाहिये॥ २॥

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