॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक POST.4.31
ये श्रीकृष्णविहारैकभजनास्वादलोलुपाः।
मुक्तावपि निराकांक्षास्तेषां भागवतं धनम्॥ ३१
ye śrīkṛṣṇavihāraikabhajanāsvādalolupāḥ|
muktāvapi nirākāṃkṣāsteṣāṃ bhāgavataṃ dhanam|| 31
अर्थ
जो केवल श्रीकृष्णकी लीलाओंके ही श्रवण, कीर्तन एवं रसास्वादनके लिये लालायित रहते और मोक्षकी भी इच्छा नहीं रखते, उनका तो श्रीमद्भागवत ही धन है॥ ३१॥