श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.36

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

इह लोके वरान् भुक्त्वा भोगान् वै मनसेप्सितान्।

श्रीभागवतसंगेन यात्यन्ते श्रीहरेः पदम्॥ ३६

iha loke varān bhuktvā bhogān vai manasepsitān|

śrībhāgavatasaṃgena yātyante śrīhareḥ padam|| 36

अर्थ

सकाम भावसे भागवतका सहारा लेनेवाले मनुष्य इस संसारमें मनोवांछित उत्तम भोगोंको भोगकर अन्तमें श्रीमद्भागवतके ही संगसे श्रीहरिके परमधामको प्राप्त हो जाते हैं॥ ३६॥

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