श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.46

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

गुरवे वस्त्रभूषादि दत्त्वा गां च समर्पयेत्।

एवं कृते विधाने तु लभते वांछितं फलम्॥ ४६

gurave vastrabhūṣādi dattvā gāṃ ca samarpayet|

evaṃ kṛte vidhāne tu labhate vāṃchitaṃ phalam|| 46

अर्थ

कथावाचक गुरुको वस्त्र, आभूषण आदि देकर गौ भी अर्पण करे। इस प्रकार विधि-विधान पूर्ण करनेपर मनुष्यको स्त्री, घर, पुत्र, राज्य और धन आदि जो-जो उसे अभीष्ट होता है, वह सब मनोवांछित फल प्राप्त होता है। परन्तु सकामभाव बहुत बड़ी विडम्बना है, वह श्रीमद्भागवतकी कथामें शोभा नहीं देता॥ ४६-४७॥

यह अर्थ श्लोक 46–47 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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