विप्रगण! इस भागवतकी अपार गहराईमें डुबकी लगाकर इसमेंसे अपनी अभीष्ट वस्तुको प्राप्त करनेमें केवल ब्रह्मा, विष्णु और शिव आदि ही समर्थ हैं; दूसरे नहीं॥ ७॥
तदानन्त्यावगाहेन स्वेप्सितावहनक्षमाः।
त एव सन्ति भो विप्रा ब्रह्मविष्णुशिवादयः॥ ७
विप्रगण! इस भागवतकी अपार गहराईमें डुबकी लगाकर इसमेंसे अपनी अभीष्ट वस्तुको प्राप्त करनेमें केवल ब्रह्मा, विष्णु और शिव आदि ही समर्थ हैं; दूसरे नहीं॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण POST.4.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 1003) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/mahatmya/skanda/4/7/