श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक POST.4.7

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य (स्कन्दपुराण) · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तदानन्त्यावगाहेन स्वेप्सितावहनक्षमाः।

त एव सन्ति भो विप्रा ब्रह्मविष्णुशिवादयः॥ ७

tadānantyāvagāhena svepsitāvahanakṣamāḥ|

ta eva santi bho viprā brahmaviṣṇuśivādayaḥ|| 7

अर्थ

विप्रगण! इस भागवतकी अपार गहराईमें डुबकी लगाकर इसमेंसे अपनी अभीष्ट वस्तुको प्राप्त करनेमें केवल ब्रह्मा, विष्णु और शिव आदि ही समर्थ हैं; दूसरे नहीं॥ ७॥

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