साथ ही भगवान् श्रीकृष्णके दर्शनके लिये उत्सुक सैकड़ों श्रेष्ठ वारांगनाएँ, जिनके मुख कपोलोंपर चमचमाते हुए कुण्डलोंकी कान्ति पड़नेसे बड़े सुन्दर दीखते थे, पालकियोंपर चढ़कर भगवान्की अगवानीके लिये चलीं॥ १९॥✎ 8081
वारमुख्याश्च शतशो यानैस्तद्दर्शनोत्सुकाः।
लसत्कुण्डलनिर्भातकपोलवदनश्रियः ॥ १९
साथ ही भगवान् श्रीकृष्णके दर्शनके लिये उत्सुक सैकड़ों श्रेष्ठ वारांगनाएँ, जिनके मुख कपोलोंपर चमचमाते हुए कुण्डलोंकी कान्ति पड़नेसे बड़े सुन्दर दीखते थे, पालकियोंपर चढ़कर भगवान्की अगवानीके लिये चलीं॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.11.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 132) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/11/19/