साक्षात् परमेश्वर ही अपनी लीलासे इस मनुष्यलोकमें अवतीर्ण हुए थे और सहस्रों रमणी-रत्नोंमें रहकर उन्होंने साधारण मनुष्यकी तरह क्रीडा की॥ ३५॥
स एष नरलोकेऽस्मिन्नवतीर्णः स्वमायया।
रेमे स्त्रीरत्नकूटस्थो भगवान् प्राकृतो यथा॥ ३५
साक्षात् परमेश्वर ही अपनी लीलासे इस मनुष्यलोकमें अवतीर्ण हुए थे और सहस्रों रमणी-रत्नोंमें रहकर उन्होंने साधारण मनुष्यकी तरह क्रीडा की॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.11.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 134) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/11/35/