श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.12.13

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तस्य प्रीतमना राजा विप्रैर्धौम्यकृपादिभिः२।

जातकं कारयामास वाचयित्वा च मङ्गलम्॥ १३

tasya prītamanā rājā viprairdhaumyakṛpādibhiḥ|

jātakaṃ kārayāmāsa vācayitvā ca maṅgalam|| 13

अर्थ

पौत्रके जन्मकी बात सुनकर राजा युधिष्ठिर मनमें बहुत प्रसन्‍न हुए। उन्होंने धौम्य, कृपाचार्य आदि ब्राह्मणोंसे मंगलवाचन और जातकर्म-संस्कार करवाये॥ १३॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—विप्रैर्जातक्रियादिभिः।

    (मुद्रित पृष्ठ 136)

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