॥ श्रीहरिः ॥
तेन सम्भृतसम्भारो धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः।
वाजिमेधैस्त्रिभि३र्भीतो यज्ञैः समयजद्धरिम्॥ ३४
tena sambhṛtasambhāro dharmaputro yudhiṣṭhiraḥ|
vājimedhaistribhirbhīto yajñaiḥ samayajaddharim|| 34
अर्थ
उससे यज्ञकी सामग्री एकत्र करके धर्मभीरु महाराज युधिष्ठिरने तीन अश्वमेधयज्ञोंके द्वारा भगवान्की पूजा की॥ ३४॥✎ 87 88
तेन सम्भृतसम्भारो धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः।
वाजिमेधैस्त्रिभिर्भीतो यज्ञैः समयजद्धरिम्॥ ३४
उससे यज्ञकी सामग्री एकत्र करके धर्मभीरु महाराज युधिष्ठिरने तीन अश्वमेधयज्ञोंके द्वारा भगवान्की पूजा की॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.12.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 138) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/12/34/टिप्पणियाँ
- ३
प्रा० पा०—त्रिभी राजा यज्ञैः।
(मुद्रित पृष्ठ 138)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
- #87 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की
- #88 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्की