श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.12.36

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

ततो राज्ञाभ्यनुज्ञातः कृष्णया सह बन्धुभिः।

ययौ द्वारवतीं ब्रह्मन् सार्जुनो यदुभिर्वृतः॥ ३६

tato rājñābhyanujñātaḥ kṛṣṇayā saha bandhubhiḥ|

yayau dvāravatīṃ brahman sārjuno yadubhirvṛtaḥ|| 36

अर्थ

शौनकजी! इसके बाद भाइयोंसहित राजा युधिष्ठिर और द्रौपदीसे अनुमति लेकर अर्जुनके साथ यदुवंशियोंसे घिरे हुए भगवान् श्रीकृष्णने द्वारकाके लिये प्रस्थान किया॥ ३६॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां प्रथमस्कन्धे नैमिषीयोपाख्याने
परीक्षिज्जन्माद्युत्कर्षो नाम द्वादशोऽध्यायः॥ १२॥

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