॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 1.13.11
अपि नः सुहृदस्तात बान्धवाः कृष्णदेवताः।✎ 1881
दृष्टाः श्रुता वा यदवः स्वपुर्यां सुखमासते॥ ११
api naḥ suhṛdastāta bāndhavāḥ kṛṣṇadevatāḥ|
dṛṣṭāḥ śrutā vā yadavaḥ svapuryāṃ sukhamāsate|| 11
अर्थ
चाचाजी! आप तीर्थयात्रा करते हुए द्वारका भी अवश्य ही गये होंगे। वहाँ हमारे सुहृद् एवं भाई-बन्धु यादवलोग, जिनके एकमात्र आराध्यदेव श्रीकृष्ण हैं, अपनी नगरीमें सुखसे तो हैं न? आपने यदि जाकर देखा नहीं होगा तो सुना तो अवश्य ही होगा॥ ११॥