श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.18

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

विदुरस्तदभिप्रेत्य धृतराष्ट्रमभाषत।

राजन्‍निर्गम्यतां शीघ्रं पश्येदं भयमागतम्॥ १८

vidurastadabhipretya dhṛtarāṣṭramabhāṣata|

rājannirgamyatāṃ śīghraṃ paśyedaṃ bhayamāgatam|| 18

अर्थ

परन्तु विदुरजीने कालकी गति जानकर अपने बड़े भाई धृतराष्ट्रसे कहा—‘महाराज! देखिये, अब बड़ा भयंकर समय आ गया है, झटपट यहाँसे निकल चलिये॥ १८॥✎ 89 90

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #89 शब्दोंके बीचका स्थान: कोधारणकर → को धारणकर
  • #90 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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