श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.19

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

प्रतिक्रिया२ न यस्येह कुतश्चित्कर्हिचित्प्रभो।

स एव भगवान् कालः सर्वेषां नः३ समागतः॥ १९

pratikriyā na yasyeha kutaścitkarhicitprabho|

sa eva bhagavān kālaḥ sarveṣāṃ naḥ samāgataḥ|| 19

अर्थ

हम सब लोगोंके सिरपर वह सर्वसमर्थ काल मँडराने लगा है, जिसके टालनेका कहीं भी कोई उपाय नहीं है॥ १९॥✎ 89 90

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—प्रतिक्रियां न पश्येऽहं कुतश्चित्।

    (मुद्रित पृष्ठ 141)
  2. ३

    प्रा० पा०—वः।

    (मुद्रित पृष्ठ 141)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #89 शब्दोंके बीचका स्थान: कोधारणकर → को धारणकर
  • #90 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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