श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.37

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

अथाजगाम भगवान् नारदः सहतुम्बुरुः।

प्रत्युत्थायाभिवाद्याह सानुजोऽभ्यर्चयन्‍निव॥ ३७

athājagāma bhagavān nāradaḥ sahatumburuḥ|

pratyutthāyābhivādyāha sānujo'bhyarcayanniva|| 37

अर्थ

संजय इस प्रकार कह ही रहे थे कि तुम्बुरुके साथ देवर्षि नारदजी वहाँ आ पहुँचे। महाराज युधिष्ठिरने भाइयोंसहित उठकर उन्हें प्रणाम किया और उनका सम्मान करते हुए बोले—॥ ३७॥

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